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बिहार में पंचायत सोलर स्ट्रीट लाइटों पर ऑनलाइन निगरानी, खराब लाइटों की शिकायत अब डिजिटल सिस्टम से होगी ट्रैक

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बिहार सरकार पंचायत स्तर पर सोलर स्ट्रीट लाइटों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग व्यवस्था लागू करने जा रही है। इससे लाइटों की स्थिति रियल टाइम में ट्रैक होगी और खराबी की शिकायतों का त्वरित समाधान किया जाएगा।

पटना/आलम की खबर:बिहार में ग्रामीण विकास को नई दिशा देने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब पंचायत स्तर पर लगाई गई सोलर स्ट्रीट लाइटों की निगरानी पूरी तरह ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से की जाएगी। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में प्रकाश व्यवस्था को मजबूत बनाना और रखरखाव में पारदर्शिता लाना है। सरकार का मानना है कि इस डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम से न केवल योजनाओं की वास्तविक स्थिति सामने आएगी बल्कि अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से यह शिकायत मिलती रही है कि कई जगहों पर सोलर स्ट्रीट लाइटें लगने के बाद भी या तो खराब पड़ी रहती हैं या समय पर उनकी मरम्मत नहीं हो पाती। कई बार तकनीकी खराबी या रखरखाव की कमी के कारण गांवों में अंधेरे की समस्या बनी रहती है, जिससे सुरक्षा पर भी असर पड़ता है। इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अब एक केंद्रीकृत डिजिटल निगरानी व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है।

ऑनलाइन सिस्टम से रियल टाइम ट्रैक होगी लाइटों की स्थिति

नई व्यवस्था के तहत पंचायतों में लगी हर सोलर स्ट्रीट लाइट की स्थिति को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपडेट किया जाएगा। इससे यह जानकारी तुरंत उपलब्ध होगी कि कौन सी लाइट चालू है और कौन सी तकनीकी खराबी के कारण बंद है। पंचायत प्रतिनिधि, स्थानीय अधिकारी और आम नागरिक सभी इस सिस्टम के माध्यम से जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

सरकार का मानना है कि इस तरह की पारदर्शी व्यवस्था से शिकायतों का समाधान तेज होगा और मरम्मत कार्य में देरी नहीं होगी। अब किसी भी खराब लाइट की जानकारी सीधे सिस्टम में दर्ज होगी और संबंधित विभाग को तुरंत अलर्ट मिलेगा। इससे फील्ड स्तर पर निगरानी मजबूत होगी और योजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार आएगा।

शिकायत निवारण प्रणाली को भी किया जाएगा मजबूत

इस नई पहल के साथ ही सरकार ने शिकायत निवारण तंत्र को भी मजबूत करने का निर्देश दिया है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की समीक्षा बैठक में यह साफ किया गया कि आम जनता की शिकायतों को गंभीरता से लेना अनिवार्य है।

केंद्र सरकार के सीपीग्राम्स पोर्टल पर दर्ज शिकायतों की नियमित समीक्षा की जाएगी और अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे समय-समय पर पोर्टल पर लॉगिन कर लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा करें। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि शिकायतों के समाधान के बाद उसकी रिपोर्ट भी समय पर अपलोड हो।

सरकार का कहना है कि कई बार शिकायतें लंबित रह जाने से जनता में असंतोष बढ़ता है, इसलिए डिजिटल मॉनिटरिंग के साथ शिकायत निवारण को भी प्रभावी बनाना जरूरी है।

गांवों में सुरक्षा और सुविधा दोनों पर फोकस

पंचायतों में सोलर स्ट्रीट लाइट योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि के समय बेहतर रोशनी उपलब्ध कराना है। इससे न केवल सुरक्षा बढ़ती है बल्कि सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों में भी सुधार आता है।

नई डिजिटल व्यवस्था के तहत अब गांवों में बिजली व्यवस्था की तरह सोलर लाइटों की भी नियमित निगरानी होगी। इससे खराब लाइटों की मरम्मत समय पर हो सकेगी और गांवों में अंधेरे की समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी।

अधिकारियों का कहना है कि इस सिस्टम से योजनाओं का सही क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा और विकास कार्यों की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।

वित्त आयोग की योजनाओं पर भी हुई समीक्षा

हाल ही में हुई विभागीय समीक्षा बैठक में छठे राज्य वित्त आयोग और 15वें वित्त आयोग के तहत चल रही योजनाओं की प्रगति पर भी चर्चा की गई। रिपोर्ट के अनुसार कई पंचायतों में सड़क, नाली, पेयजल और प्रकाश व्यवस्था से जुड़े कार्य तेजी से चल रहे हैं।

हालांकि कुछ जगहों पर काम की धीमी गति और लंबित उपयोगिता प्रमाण पत्र को लेकर चिंता भी जताई गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि सभी लंबित कार्यों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए और विकास योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए।

डिजिटल बिहार की ओर एक और कदम

सरकार का स्पष्ट मानना है कि पंचायत स्तर पर तकनीक का उपयोग बढ़ाना समय की मांग है। ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम से न केवल प्रशासनिक कार्यों में सुधार होगा बल्कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर भी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।

इस पहल को ग्रामीण विकास की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में पंचायत स्तर पर और भी सेवाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़े जाने की योजना है, ताकि गांवों को स्मार्ट और सुविधाजनक बनाया जा सके।

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